द्वादशादित्यव्रत
( विष्णुधर्मोत्तर ) - मार्गशीर्ष शुक्ल द्वादशीसे आरम्भ करके प्रत्येक शुक्ल द्वादशीको १ मार्गशीर्षमें धाता, २ पौषमें मित्र, ३ माघमें अर्यमा, ४ फाल्गुनमें पूषा, ५ चैत्रमें शक्र, ६ वैशाखमें अंशुमान्, ७ ज्येष्ठमें वरुण, ८ आषाढ़में भग, ९ श्रावणमें त्वष्टा, १० भाद्रपदमें विवस्वान्, ११ आश्विनमें सविता और १२ कार्तिकमें विष्णु - इन नामोंसे सूर्यभगवानका यथाविधि पूजन करे और जितेन्द्रिय होकर व्रत करे तो सब प्रकारकी आपत्तियोंका नाश और सब प्रकारके सुखोंकी वृद्धि होती है ।